22 जनवरी, 2008

सफेदपोश डॉन की शादी






बेटी...तेरी कैसी बारात आई है...तेरी कैसी डोली उठी है...पुलिस, मीडिया और सैकड़ो लोगों की आंखों के सामने एक कैदी ने की अपनी प्रेमिका की लाश से शादी । सभी को लगा कि दोनों एक-दूसरे को बेहद प्यार करते हैं। इसलिये प्रेमी ने अपनी प्रेमिका की आखिरी ख्वाहिश मरने की बाद पूरी कर दी। दुल्हा था दिल्ली का जाना-माना शख्स रोमेश शर्मा। वही रोमेश शर्मा जिसकी कभी राजधानी दिल्ली की राजनीति में तूती बोलती थी। दुल्हन थी रोमेश की महबूबा कुंजम बुद्धिराजा, जिसकी 20 मार्च 1999 को किसी ने रोमेश शर्मा के 'जय माता दी' फार्म हाउस में बड़े ही बेरहमी से हत्या कर दी थी। हत्या के वक्त रोमेश शर्मा तिहाड़ जेल में बंद था। उस पर हैलीकॉप्टर चोरी करने से लेकर अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का दिल्ली में बेस बनाने तक के आरोप थे।
लेकिन जेल जाने से पहले रोमेश शर्मा दिल्ली से लेकर लखनऊ और पटना तक की राजनीति का एक जाना-माना चेहरा था। कोई सी ऐसी राजनैतिक पार्टी नहीं थी जिसमें रोमेश शर्मा कि घुसपैठ नहीं थी। दिल्ली के अमीर लोगों की लिस्ट में जिसका नाम शुमार था। रोमेश शर्मा को मंहगी गाड़ियां रखने का भी शौक था। मर्सिडीज हो या पजेरो या फिर देशी गाड़ियां सभी उसकी कोठी के बाहर कतार से खड़ी रहती थीं। उसके दिल्ली स्थित जय माता दी फार्म हाउस में एक हेलीकॉप्टर सभी की आंखों में खटकता था। दिल्ली से लेकर मुंबई तक रोमेश शर्मा की करोड़ो की संपत्ति थी। राजधानी दिल्ली का शायद ही कोई ऐसा पॉश इलाका बचा हो जहां पर रोमेश शर्मा ने किसी कोठी पर कब्जा ना कर रखा हो। पंचशील इंक्लेव मे राज्य-सभा के एक पूर्व अधिकारी की कोठी हो या फिर कनॉट प्लेस की रीगल बिल्डिंग या फिर मेयफेयर गार्डन मे आईबी के पूर्व अधिकारी के बेटे की कोठी, सभी पर रोमेश शर्मा का कब्जा था। यहां तक की जिस जय माता दी फार्म हाउस में कुंजम बुद्दिराजा का मर्डर हुआ था उसपर भी रोमेश शर्मा का सांसद एम के सुब्बा से विवाद चल रहा था। खुद कुंजम बुद्दिराजा को रोमेश शर्मा ने साउथ दिल्ली के एक मंहगे इलाके में कोठी दिलवा रखी थी। लेकिन पुलिस फाईलों में ये सारी सपंत्ति उसके नाम से दर्ज हुई थी फर्जीवाड़े से। फर्जी कागजातों से वो ये सारी प्रोपट्री अपने नाम करा लेता था।
इलाहाबाद के एक मामूली किसान के बेटे ने फर्जीवाड़े से करोड़ो की प्रोपट्री खड़ी कर ली थी लेकिन उसके खिलाफ मुंह खोलने वाला कोई नहीं था। अगर था तो उसकी शिकायत को दबा दिया जाता। रोमेश शर्मा के फार्म हाउस में खडे हेलीकाप्टर के मालिक ने उसके खिलाफ कई बार शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की। मालिक का आरोप था कि रोमेश शर्मा ने हेलीकॉप्टर इलाहाबाद में चुनाव प्रचार के लिये लिया था लेकिन फर्जीवाड़े और अपने उंचे रसूख के चलते वापस नहीं किया था। चुनाव प्रचार के दौरान ही रोमेश शर्मा कि मुलाकात हुई कुंजम बुद्दिराजा नाम की एक खूबसूरत लडकी से। कुछ ही दिनों में दोनों एक दूसरे के बेहद करीब आ गये। रोमेश शर्मा ने कुंजम को राजधानी दिल्ली के एक पॉश इलाके मे कोठी दिलावा रखी थी। कुंजम रोमेश शर्मा के राजनैतिक करियर से लेकर उन सभी मामलों में राजदार हो गई जिससे दुनिया बेखबर थी। दोनों जल्द ही शादी करने वाले थे कि दुबई से आये एक फोन कॉल ने दोनों को एक दूसरे से हमेशा के लिया अलग कर दिया।
दरअसल दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और सीबीआई दुबई से आने वाले सभी फोन कॉल्स को सर्विलांस पर लगाकर सुन रही थी कि दक्षिणी दिल्ली के एक फोन नंबर पर कॉल ने उन्हे हिला कर रख दिया। दुबई से फोन करने वाला शख्स था अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम। अबू सलेम फोन पर दिल्ली के उस नंबर पर किसी को बबलू श्रीवास्तव को जान से मारने का हुक्म जारी कर रहा था। अबू सलेम उस शख्स को हर कीमत पर अपने आका दाऊद इब्राहिम के जानी दुश्मन बबलू श्रीवास्तव को खत्म करने की प्लानिंग बता रहा था। फोन पर हुई बातचीत सुनकर जॉच एजेंसियो ने दिल्ली के उस नंबर का पता करना शुरु किया जिससे अबू सलेम ने बात की थी। जॉच अधिकारियों को पता चला कि वो नंबर था दिल्ली के सबसे बडे दलाल रोमेश शर्मा का।

गिरफ्तारी के बाद रोमेश शर्मा के एक के बाद एक सभी राज़ खुलने शुरु हो गये। ये बात साफ हो गई कि वो अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के लिये दिल्ली में काम करता था। एक ही दिन में उसपर एक दर्जन से भी ज्यादा मामले दर्ज कर दिये गये। इन मामलों में मुंबई की एक कंपनी का हेलीकॉप्टर चोरी करने और मालिक का अपहरण और जान से मारने की धमकी का मामला भी शामिल था। रातों-रात उसके सभी ठिकाने पर इन्कम टैक्स डिपार्टेमेंट की छापेमारी की गई। उसके घर पर खडी मंहगी गाडियां और विदेशी शराब भारी मात्रा में बरामद की गई। जेल में बंद बबलू श्रीवास्तव को जान से मारने की साजिश रचने का मामला भी उसपर दर्ज कर दिया गया। सीबाआई और दिल्ली पुलिस उसके पीछे हाथ धोकर पड़ गई। किसी भी मामले में उसे जमानत मिलना मुश्किल हो गया।

रोमेश शर्मा की गिरफ्तारी के बाद उसके कई बडे राजनितिज्ञों से ताल्लुक सामने आये। संसद तक उसका मामला उछला। किसी समय उसके रहे अच्छे दोस्तों ने भी उससे अपना नाता तोड़ लिया। गृह मंत्रालय पर उससे जुडे मामले को साफ करने का दबाब पड़ने लगा। यहां तक की खुद गृह मंत्रालय ने सीबीआई को दिल्ली पुलिस के रोमेश शर्मा से संबधो के बारे में जॉच के आदेश दे डाले।
सूत्र बताते हैं कि जॉच एजेंसियां रातों-रात रोमेश शर्मा के पीछे एक खास मकसद से पड़ी थीं। बताते हैं कि उसने कई बड़ी पार्टियो के नेताओं (महिलाएं भी शामिल थीं) की आपत्तिजनक सीडी तैयार कर ली थी।
देश की सभी जॉ़च एजेंसी रोमेश शर्मा के पीछे पड गई थी, लेकिन उसकी एक दोस्त ऐसी भी थी जो उसे अभी भी दिलों-जान से चाहती थी। जेल जाने के बाबजूद वो उसे बेपनाह मुहब्बत करती थी। वो थी कुंजुम। वही कुंजुम जिसने जेल जाने से पहले रोमेश शर्मा के साथ जीने-मरने की कसमे खाई थी। रोमेश तिहाड़ जेल में कड़ी निगरानी में था लेकिन कुंजुम अपने प्यार का इजहार और उसकी सलामती के लिये ढेरो खत लिखती। इन खतों के जरिये रोमेश शर्मा को लगता कि कोई तो है जो उसे अभी भी चाहता है। कुंजुम के खतो का मजमून कुछ यूं होता....
मेरी लिये ये बहुत पीड़ादायक है कि मै आजाद हूं लेकिन आप के लिये कुछ नहीं कर पा रही हूं। स्वीटहार्ट, मुझे तुम पर गर्व है और मै इस ब्रहामंड (GALAXY) की सबसे लकी (भाग्यशाली) लड़की हूं जो तुम जैसा जीवनसाथी मुझे मिला है। मुझे भगवान से इससे ज्यादा कुछ नही चाहिये।....स्वीटहार्ट तुम्हे मेरे लिये और सिर्फ मेरे लिये बहादुर (BRAVE) बनना पड़ेगा। भगवान की कृपा हम पर जरुर होगी। आपको मेरी कसम है जो आपने अपना दिल छोटा किया। स्वीटहार्ट मुझे जिंदगी से बस आपका साथ चाहिये। इस दुनिया मे आपका कोई मुकाबला नहीं है।
हर चिठ्ठी में कुंजुम रोमेश शर्मा को अपने जिंदगी से जुड़ी छोटी-बडी बातें सभी उसे बताती। यहां तक की उसके पालतू कुत्ते क्या करते हैं वो सब भी बताती। रोमेश शर्मा के बिजनेस के बारे में बताती। वो जानती थी कि जेल में रोमेश शर्मा की जिंदगी किन मुश्किलों से बीत रही थी। ऐशो आराम की जिंदगी जीने वाले शख्स को तिहाड़ की हाई रिस्क वार्ड में रखा जो गया था। वो अपने आप को भी कोसती कि वो रोमेश शर्मा की रिहाई के लिये कुछ नहीं कर पा रही थी। वो उसकी तुलना बालीवुड स्टार संजय दत्त से करती। खतों के जरिये वो उसका मन बहलाने की कोशिश करती। लेकिन हर खत में वो रोमेश के लिये अपने प्यार का इजहार करना कभी नहीं भूलती थी।

माई डियरस्ट रोमेशजी,
पता चला कि आपकी तबीयत खराब है। यह सुनकर भी मजबूर हूं। दुआ के अलावा कुछ नही कर सकती। आपके कष्ट तकलीफें आपके साथ बांट तो नहीं सकती पर यहां पर आपकी हर तकलीफ का एहसास कर सकती हूं। खाते समय, नहाते समय, जब सर्दी लगती है, जब दो-दो दिन कमरे में अकेली बैठी रहती हूं, जब रातो को चारो तरफ खामोशी होती है तब आप क्या और कैसे कर रहे होंगे सोचकर भगवान के आगे नाक रगड़ती हूं। कहती हूं भगवान रहम करो , क्षमा करो, हम आपकी दया के योग्य हैं...

कुंजुम रोमेश शर्मा को देखकर किस कदर बैचेन हो जाती है वो खुद उसने एक चिठ्ठी में लिखा था। उस दिन रोमेश शर्मा की राजधानी दिल्ली की एक अदालत में पेशी हुई थी। कोर्ट परिसर में कुंजुम भी मौजूद थी। लेकिन चाह कर भी वो रोमेश शर्मा से नही मिल सकी। रात को ही उसने एक लैटर लिखा....
स्वीटहार्ट जब आज मैने आपको अदालत में कुछ मिनटो के लिये देखा था तो मैं अपने आप को रोक नहीं पा रही थी। मै आपको अपनी बांहो में भरना चाहती थी और चाहती थी कि दुनिया की नजरों से आपको कही ओर ले जाऊं।

रोमेश शर्मा को अभी जेल गये छह महीने भी नहीं बीते थे कि 20 मार्च 1999 को उसके जय माता दी फार्म हाउस में मिली कुंजम बुद्दिराजा की खून से लथपथ लाश। किसी ने बड़े ही बेरहमी से उसकी हत्या कर दी थी। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि कुंजम की जान का दुश्मन कौन हो सकता है। रोमेश शर्मा के जेल जाने के बाद भी उसके रिश्ते कुंजम से कम नहीं हुये थे। हत्या के वक्त कुंजम सर्वप्रिया विहार इलाके में अपने मॉ के साथ रहती थी। लेकिन वो फार्म हाउस क्या करने गई थी ये बात पुलिस को लगातार परेशान कर रही थी।
पुलिस अभी कुंजम के कातिलों का पता करने में जुटी ही थी कि वारदात से अगले दिन रोमेश शर्मा पैरोल पर एक दिन के लिये पुलिस कस्टडी में बाहर आया। कुंजम के अंतिम संस्कार के वक्त रोमेश शर्मा ने सैकड़ो लोगो की मौजूदगी में उसे अपना जीवनसाथी बना लिया। लाश से शादी के बाद रोमेश शर्मा वापस तिहाड़ जेल चला गया। लेकिन तफ्तीश के दौरान पुलिस को पता चला कि कुंजम की हत्या रोमेश शर्मा के भतीजे सुरेन्द्र मिश्रा ने करवाई है। पुलिस ने सुरेन्द्र से कडी पूछताछ की तो पता चला कि उसने अपने साथियो से कुंजुम की हत्या करवाई थी। सुरेन्द्र ने पुलिस को बताया कि रोमेश शर्मा के जेल जाने के बाद कुंजुम उसकी साऱी प्रोपट्री पर कब्जा करना चाहती थी, इसलिये उसने रोमेश शर्मा की दोनो बहनो के साथ मिलकर उसकी हत्या करवा दी थी। तफ्तीश आगे बढ़ी तो पुलिस को कुंजुम के घर से मिला एक पत्र। ये लैटर जेल से रोमेश शर्मा ने कुंजुम को लिखा था। पत्र में रोमेश शर्मा ने लिखा था कि नवरात्रों के दिनों में कुंजुम उसके फार्म हाउस में बने मंदिर में पूजा करने जरुर जाये। पुलिस को लगने लगा कि कुंजुम को एक साजिश के तहत फार्म हाउस भेजा गया था।
जॉच मे ये भी सामने आया कि रोमेश शर्मा ने ही अपने भतीजे को कुंजुम को मारने का हुक्म दिया था। रोमेश शर्मा को लगने लगा था कि कुंजुम उसके राज जॉच एजेंसियों को बता सकता है। दूसरी तरफ सुरेन्द्र मिश्रा को लगता था कि कुंजुम के मारे जाने के बाद रोमेश शर्मा की सारी प्रोपट्री उसकी हो जायेगी। इसलिये उसने अपने साथियों से कुंजुम की हत्या करवा डाली।
करीब नौ साल बाद जल्द ही कुंजुम के हत्या के मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत को अपना फैसला सुनाना है। हर किसी को उस दिन का इंतजार है जब कुंजुम के हत्यारों को सजा सुनाई जाये। लेकिन रोमेश शर्मा के वकीलो को उम्मीद है कि वो निर्दोष है और पुलिस ने इस मामले में उन्हे बिना किसी पुख्ता सबूत के फंसाया है। उनकी माने तो जिस पत्र को आधार बनाकर पुलिस ने कुंजुम की हत्या के मामले में रोमेश शर्मा को आरोपी बनाया है वो पहला ऐसा लैटर नही है। जेल में रहते वक्त रोमेश शर्मा ने कुंजम को कई लैटर लिखे थे। यानि ऐसा नहीं था कि रोमेश शर्मा ने जानबूझकर कुंजुम को वो लैटर लिखा था।
पिछले दस सालो से जेल में बंद रोमेश शर्मा के करीब एक दर्जन से भी ज्यादा मामलो में दो में उसे सजा सुनाई जा चुकी है। इनमे से एक गैर-कानूनी तरीके से अपने घर में विदेशी शराब रखने और दूसरा विदेशी मुद्रा के विनियम का मामला है। तीन मामलों में अदालत रोमेश शर्मा को बरी कर चुकी है जबकि एक केस में उसका पीड़ित पक्ष से समझौता हो चुका है। एक मामले में शिकायत करने वाले की मौत हो चुकी है। कुंजुम की हत्या के अलावा अभी एक ओर मामला ऐसा है जिसमे रोमेश शर्मा को मुश्किले हो सकती हैं, वो है अबू सलेम के साथ मिलकर दिल्ली के बडे व्यापारियों से वसूली करना। हैलीकॉप्टर चोरी का मामला भी अभी कोर्ट में लंबित है।

5 टिप्‍पणियां:

प्रभाकर पाण्डेय ने कहा…

लंबा लेख है लेकिन बाँध को रखता है पाठक को। बहुत ही अच्छा लिखते हैं आप। एक नगण्य अशुद्धि की ओर आपका ध्यान ले जाना चाहता हूँ- इसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ।
बहुवचनीय शब्दों में आपने ऊपर बिंदी या चन्द्रबिंदु का प्रयोग नहीं किया है, जैसे- आंखो (आंखों) ऐसे ही---दोनो,करते है।,लोगो,गाडिया इत्यादि। नहीं, खडी आदि को भी ठीक करें तो लेख का महत्त्व और भी बढ़ जाए।

मिहिरभोज ने कहा…

गजब लिखा है,

रवीन्द्र रंजन ने कहा…

बहुत अच्छी रिपोर्ट है। इसे पढ़ा भी और टीवी पर देखा भी। बधाई हो आपको।

Ashok Kaushik ने कहा…

तुस्सी छा गए जी... एक गुनाह को कहानी की शक्ल में काफी रोचक तरीके से पेश किया है। बधाई।

बेनामी ने कहा…

awesom Neeraj sir, nice report

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जनमत

मेरी अलग-अलग पोस्ट पर लोगों की राय...

1. सर, आपके हर लेख में---आपके हर अनुभव का मिश्रण होता है--जो हर बार एक नई सीख देता है। पत्रकारिता में नए हैं पर बहुत कुछ सीखने की तमन्ना है। जहां तक ट्रैन वाले अंकलजी की बात है उसपर आपका जबाब बिल्कुल सही था कि ये तो हर फिल्ड में होता है और ये सही भी है। (मनोज एटलस, 9 अगस्त 2009 को 'आर्मी कभी मत ज्वाइन करना' में)

2. बहुत अच्छा लिखा है। अभी मीडिया में कैरियर की शुरुआत की है, पढ़ता हूं तो सीखने को बहुत कुछ मिलता है। (मनोज कुमार, 2 अगस्त 2009 को 'सरकार बनी, क्राइम रिपोर्टर खुश' में)

3. बहुत लंबी पोल खोली आपने दिल्ली के पत्रकारों की। (वर्षा, 14 मार्च 2009 को 'पत्रकारों का स्वागत कैसे करें', में)

4. पत्रकारों के सरकारी दामाद बनने के शौक के चलते ही मीडिया की और लोकतंत्र की यह दुर्दशा है। आलेख काफी लंबा था। समझ नहीं आया कि आप पत्रकार बिरादरी के साथ मनाने वाले दल के सदस्य के तौर पर थे ता डायरेक्टर साहब के मन की बात जानकर केवल उन्हीं की करतूतों की रिपोर्टिंग करने गये थे। उम्मीद है टिप्पणी प्रकाशित जरुर होगी। (सरिथा, 14 मार्च 2009 को 'पत्रकारों का स्वागत कैसे करें' में)

5. सही है भाई। अपनी बिरादरी के लोगों का गुनाह खुद ही कबूल करने की हिम्मत...काबिल-ए-तारीफ। बधाई। (चण्डीदत्त शुक्ल, 19 मार्च 2009 को 'पत्रकारों का स्वागत कैसे करें' में)

6. जितना रोचक ये संस्मरण है--उससे ज्यादा काबिले-तारीफ है आपकी स्मरण-शक्ति. बरसों पहले की गई कवरेज के आपको नाम-गाम और पते ठिकाने सब याद है. बधाई। एक बात तो आप भी मानेंगे बंधु कि दिल्लीवाले पत्रकार सरकारी मेहमान थे--लिहाजा वो स्तरीय ट्रीटमेंट के हकदार थे और उनके लिए सारे इंतजाम करना सरकार का कर्तव्य था--जहां तक मैं समझता हूं डायरेक्टर साहब भी इस बात को अच्छी तरह जानते थे। दिल्ली में बैठे पत्रकार कम नहीं हैं, तो भला दिल्ली में बैठा कोई अफसर इतना भोला कैसे हो सकता है...अगर सफर की शुरुआत में ही सीएम साहब के दरबार में सीधी दस्तक दे दी जाती, तो शर्तिया तौर पर इस परेशानी से बचा जा सकता था. (अशोक कौशिक, 29 मार्च 2009 को 'पत्रकारों का स्वागत कैसे करें' में)

7. बहुत रोचक आलेख. इतनी सारी जानकारी और तस्वीरें एक वृतांत में. आन्नद आ गया नीरज भाई. लिखते रहिए नियमित. (उडन तश्तरी, 23 फरवरी 2009 को 'हल्दीघाटी पीली नहीं लाल है' में)

8. नीरज भाई, आपने अदालत के फैसले को पढ़ा और आप इस खबर को शुरु से कवर करतें रहें हो, इसलिए आपके राईटअप में आपकी पकड़ दिख रही हैं...और बिल्कुल सही है कि ये बह्रामंड का सबसे क्रूरतम मानव है। शायद इनके लिए ये सजा कम है। अगर इससे भी बड़ी कोई सजा होती तो वो मिलनी चाहिए थी। (सुजीत कुमार, 15 फरवरी, 2009 को 'बह्रामण्ड का क्रूरतम मानव' में)

9. क्षमा चाहता हूं मैं आपसे और इस फैसले से सहमत नहीं हूं। इनसे भी ज्यादा क्रूर नरपिशाच है दुनिया में. वे जो इन्हे सरक्षंण देते है और जो इनके टुकड़ो पर पलते हैं. वे जो मारे जाने वाले निर्दोष लोगों के माननधिकारों की चिंता नहीं करते, पर निरीह लोगों को बेवजह मार देने नावे आतंकियों के मानवधिकारों की बात करते हैं. ऐसे लोग सिर्फ राजनेता ही नहीं हैं, कार्यपालिका, न्यायपालिका और यहां तक कि चौथे खम्बे और साहित्य में भी हैं. उनके बारे में क्या सोचते हैं आप ? (इष्ट देव सांकृत्यायन, 15 फरवरी 2009 को 'बह्रामण्ड का क्रूरतम मानव' में)

10. सोनू पंजाबन को इतना ग्लैमराइज क्यों कर दिया गया है. क्या और सोनू पंजाबने बनाने के लिए. (वर्षा, 24 नबम्बर 2008 को 'सीक्रेट डायरी ऑफ ए कॉल गर्ल' में)

11. A very intersting post on RTI. ( Sachin Agarwal , 11 October 2008 in 'आरटीआई वाला हत्यारा')

12. नीरज, बढिया लिखे हो। महिलाओं का योन शोषण नहीं होना चाहिये। लेकिन मैं बताउं जासूसी का खेल मर्यादा और कानूनी दायरे से बाहर होता है। इसके दायरे में रह कर जासूसी नहीं हो सकता। जासूसी के ट्रेनिंग के दौरान हीं जासुसों को बेहाया बना दिया जाता है। सेक्स का कोई मायने नहीं। जासूसी के खेल में सेक्स की जो भी कल्पना कर ले सभी प्रकार का खेल होता है। लेकिन अपने देश की रक्षा में। इसी के आड़ में कुछ अधिकारी अपने हीं महिला सदस्य के साथ ऐसा करे यह गलत है। (राजेश कुमार, 24 अगस्त 2008 को 'रॉ सेक्स स्कैंडल' में)

13. कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हैजरा तबियत से एक पत्थर तो उछालो यारों... आप खुद ही कह रहे हैं कि रॉ के बारे में किसी को कुछ भी नहीं पता चल सकता.. उसके अंदर परिंदा भी पर नहीं मार सकता... आप ये सब कुछ कहते हुए रॉ की तमाम अंदरूनी बातों को अपने ब्लाग से उजागर करते चले जा रहे हैं ... बहुत खूब..अच्छा तरीका है बखिया उधेड़ने का. (बेनामी, 3 सितम्बर 2008 को 'रॉ सेक्स स्कैंडल' में)

14. अच्छी जानकारी देने के लिए धन्यवाद. सुंदर लेख है...(विनीता, 20 अगस्त 2008 को 'सूरज अस्त, नेपाल मस्त' में)

15. thanx for ur travelogue! nice post! (Munish, 20 August 2008 in 'सूरज अस्त, नेपाल मस्त' में)

16. आपका पहला सफर तो 'हवा-हवाई'हो गया था लेकिन अब लगता है कि नेपाल में भी आपको कुछ रस मिलने लगा है तभी तो नेपाल की तारीफों के पुल बांधते नहीं थक रहे हैं.. कारण चाहे जो भी हो पर नेपाल है काफी अच्छी जगह.. अगर लुत्फ उठाना हो तो नेपाल से अच्छी जगह दुनिया में कोई नहीं.. लेकिन सर.. जरा संभल के, क्योकि चमकता जो नजर आता है सब सोना नही होता...(दीप चंद्र शुक्ल, 3 सितंबर 2008 को 'सूरज अस्त, नेपाल मस्त' में)

17. काफ़ी रोचक साक्षात्कार है ये.अच्छा लगा शोभराज के कई अनजाने पहलुओं को जानकर. (बालकिशन, 29 जुलाई 2008 को 'चार्ल्स शोभराज से खास बातचीत' में)

18. इतना व्यस्त रहने के बावजूद आप अपने ब्लॉग को दुरुस्त रखते हैं।यह चीज मुझे आपकी तारीफ करने को मजबूर कर रही है।कृपया इसे बनायें रखें।।।।आशा है अापके अनुभव समाज को आपराधिक प्रवृति को समझने में मदद करते रहेंगे।।।।।।।।।।।।। (मंयक, 7 जुलाई 2008 को 'बिकनी किलर की आशिकी' में)

19. यह जानकर खुशी हुई कि आप खबरों(विशेषकर इस खबर को लेकर)को टीआरपी के चश्में से नहीं देखते हैं।जैसा आपके अन्य साथियों देखते हैं।(मसाला मिल गया)आपका blog देखा तो comment करने की हिमाकत कर रहा हूँ।उम्मीद है आप इसी तरह खबरों के प्रति ईमानदार नजरिया रखेंगे। (मंयक, 9 जून 2008 को 'ब्लॉग के लिए टाइम नहीं मिला' में)

20. नीरज जी , आपका ब्लॉग गुनाहगार मैं लगातार देखता रहता हूँ ...अपराध पर अच्छी खबरें देखने को मिलती है ...जहाँ तक बहुचर्चित आरुषि हत्याकांड की बात है तो ...स्टार न्यूज़ पर अभी (देर रात बारह बजकर पचास मिनट पर) आपका ही फोनो देख रहा था .शायद खुलासा होने ही वाला है ...आज जैसा है रेणूका चौधरी ने कहा है की आरुषि पर फ़िल्म नहीं बनेगी ...अच्छी बात है ... (रामकृष्ण डोंगरे, 10 जून 2008 को 'ब्लॉग के लिए टाइम नहीं मिला' में)

21. नीरज, रोचक ब्लॉग है आपका। (हर्षवर्धन, 10 अप्रैल 2008 को 'जीनियस कॉल-गर्ल' में)

22. नीरज जी, आपका ब्लॉग आज पहली बार मैने पढ़ा है...काफी दिलचस्प था. मैं तूलिका सिंह हूं...सीएनईबी न्यूज चैनल में बतौर क्राइम रिपोर्टर काम कर रही हूं. आपको शायद याद होगा मैने बीएजी में काम किया है इंसाफ में जो कि बाद में बंद हो गया था। मै आपके ब्लॉग की सदस्य बना चाहती हूं और आपसे क्राइम रिपोर्टिंग सीखना चाहती हूं। प्लीज अपना नंबर मुझे मेल कर दीजिए. (तूलिका सिंह, 15 अप्रैल 2008 को 'जीनियस कॉल-गर्ल' में)

23. आलेख का शीर्षक(क्लाइंट नं 9)प्रभावित कर रहा है आलेख को पढने के लिए,अच्छा लगा..साथ ही आलेख के आखिर मे कंम्पयूटर के साथ स्पिटजर को भी वायरस,व्यंग्य का भी अहसास दे रहा है।इतना तो पता था कि आपकी कलम संपूर्ण भारतवर्ष के साथ नेपाल तक मार करती है,लेकिन आपकी तूलिका से लिखी सुदूर देश की कहानी बता रही है कि सारी दुनिया मे घूमती है आपकी कलम। (अभिनव उपाध्याय, 17 मार्च 2008 को 'CLIENT NO. 9 ' में)

24. very nice information.u r a unique writer who gives a whole picture of the incedent ( आशीष, 7 फरवरी 2008 को 'कंधार से पटियाला तक' में)

25. वाह!! मिर्जा का कच्चा चिटठा देने के लिए धन्यवाद (ईष्ट देव सांकृत्यायन, 27 दिसम्बर, 2007 को 'मिर्ज़ा ग़ालिब हाज़िर हो' में)

26. नीरज जी गालिब को आज आपने फिर से मेरे जेहन में जिंदा कर दिया, वरना गालिब को तो मैं भूलता ही जा रहा था, हजारो ख्वाहिशे ऐसी की हर ख्वाहिश पे दम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले (महर्षि, 27 दिसम्बर 2007 को 'मिर्ज़ा ग़ालिब हाज़िर हो' में)

27. क्या खूब थे तुम भी गालिब। तेरे नाम ने पहुँचाया गुनहगार तलक। (दिनेशराय द्विवेदी, 27 दिसम्बर 2007 को 'मिर्ज़ा ग़ालिब हाज़िर हो' में)

28. बहुत खूब मीर्ज़ा ग़ालिब की यह कहानी पढ़कर मज़ा आ गया. ब्लॉग को एक अलग रंग देने से अछा लगा. (वीर, 4 जनवरी, 2008 को 'मिर्ज़ा ग़ालिब हाज़िर हो' में)