05 फ़रवरी, 2008

कंधार से पटियाला तक


IC-814 हाईजैकिंग। याद आया कुछ? नौ साल साल पहले काठमांडू से दिल्ली आ रहे एक यात्री विमान का दहशतगर्दो नें अपहरण कर लिया था। अबतक के सबसे सनसनीखेज हाईजैकिंग मामलें ने सत्ता के गलियारों से लेकर पूरी दुनिया को हिला दिया था। एक बेगुनाह यात्री को इस हाईजैकिंग में अपनी जान से हाथ भी धोना पड़ा था। लेकिन इस वारदात को अंजाम देने वाले तीन आरोपियों को पटियाला की एक विशेष अदालत ने अब ठहराया है कसूरवार, और पहुंचा दिया है सलाखों के पीछे।
24 दिसम्बर 1999... काठमांडू के त्रिभुवन एयरपोर्ट से इंडियन एयरलाईंस का एक विमान, IC-814 दिल्ली के लिये उड़ान भरता है। 180 यात्रियों से भरे इस विमान को करीब दो घंटे में भारत की राजधानी दिल्ली पहुंचना था। दिल्ली से पहले उसे लखनऊ भी रुकना था। लेकिन जब प्लेन लखनऊ एयरपोर्ट पर नहीं उतरा तो पुलिस के साथ-साथ खुफिया एजेंसियो को एलर्ट कर दिया गया। साफ था विमान के अंदर कुछ गड़बड़ी की संभावना थी। इसी बीच प्लेन के कैप्टन से लगातार संपर्क साध रहे एयर ट्रैफिक कंट्रोल दफ्तर में गोलियों की आवाज सुनाई देती है। थोड़ी ही देर में कैप्टन का मैसेज मिल चुका था। प्लेन को हाईजैक कर लिया गया है। हाईजैक की खबर मिलती ही देश में मानो हड़कंप मच गया। पूरा देश जहां क्रिसमस और नये साल की तैयारी में जुटा था, हाईजैक की खबर मिलते ही पूरे देश में मानो मातम छा गया। विमान में बैठे यात्रियों के घरवालों ने एयरपोर्ट पर डेरा डाल दिया। वो अपने परिजनों की सलामती के लिये हंगामा मचाने लगे।

एक तरफ IC-814 के अपहरण से चारो तरफ हड़कंप मच गया था, वही पुलिस और जॉच एजेंसियां ये पता करने में जुटी थी कि इस हाईजैकिंग के पीछे आखिर है कौन। अपहरणकर्ता विमान को दिल्ली के बजाय अमृतसर एयरपोर्ट ले गये थे। वहां उन्होने विमान में तेल भरवाने का फरमान जारी किया। जॉच एजेंसियां इसी ताक में बैठी थी कि जैसे ही विमान कही रुकता है वो फौरन अपनी कार्यवाही को अंजाम दे यात्रियों को बचा लेंगी। लेकिन इसी बीच तेल मिलने में हो रही देरी के चलते अपहरणकर्ताओं को कुछ शक हुआ और उन्होने विमान में बैठे एक यात्री की गोली मारकर हत्या कर दी। मरने वाले यात्री का नाम था रुपेन कत्याल। कुछ दिन पहले ही रुपने की शादी हुई थी और वो अपने पत्नी के साथ हनीमून मनाकर काठमांडू से लौट रहा था। एक यात्री की मौत से जॉच एजेंसियां सकते में आ गई। एनएसजी यानि नेशनल सिक्योरिटी फोर्स के कमांडो अपने ऑपरेशन के लिये तैयार थे लेकिन उन्हे एक्शन लेना के लिये हरी झंडी नहीं मिल पाई। नतीजा ये था कि एनएसजी के कमांडो मुंह ताकते रह गये और विमान अमृतसर एयरपोर्ट से निकल चुका था।
IC-814 विमान अब अमृतसर एयरपोर्ट और हिन्दुस्तान की सीमा से बाहर निकलकर पाकिस्तान में दाखिल हो चुका था। लाहौर में एक बार फिर तेल भरवाने के बाद विमान दुबई की ओर कूच कर गया। दुबई एयरपोर्ट पर विमान पहुंचा तो वहां के अधिकारियों ने अपहरणकर्ताओं से बातचीत करनी चाही। दुबई के अधिकारी हाईजैकरस से एक शर्त पर बात करने के लिये तैयार हो गये। शर्त ये थी कि विमान में बैठे सभी बूढ़े, बच्चे और महिलाओं को छोड़ दिया जाये। अपहरणकर्ता दुबई के अधिकारियों की बात माने के लिये तैयार हो गये। साथ ही उन्होने रुपेन कत्याल की लाश को भी विमान से नीचे उतार कर दुबई सरकार के हवाले कर दिया।
प्लेन से बच्चे, बूढ़े और महिलाओं को उतारने के बाद अपहरणकर्ता 25 दिसम्बर की सुबह विमान को दुबई से अफगानिस्तान ले गये थे। कुछ घंटे बाद ही विमान अफगानिस्तान के कंधार एयरपोर्ट पहुंच चुका था। अब भारत सरकार ने भी अपहरणकर्ताओं से बातचीत शुरु कर दी थी। अपहरणकर्ताओं ने विमान में बैठे सभी य़ात्रिय़ों की सकुशल वापसी के लिये हरकत उल मुजाहिदन के सरगना मौलाना मसूद अजहर और 35 दूसरे आतंकवादियों को छोड़ने की मांग रखी। साथ ही 200 मिलियर डॉलर की भी डिमांड रखी। बातचीत चलती रही और आखिरकार अपहरणकर्ता सिर्फ तीन आतंकवादियों की रिहाई के लिया तैयार हो गये। 6 जनवरी 2000.... भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह खुद तीनो आतंकवादियों को लेकर कंधार पहुंचे और अपहरणकर्ताओं के हवाले कर दिया। इसके बदले में अपहरणकर्ताओं ने सभी यात्रियों को रिहा कर दिया। सभी पांचो अपहरणकर्ता तीनो आंतकवादियों के साथ एक जीप में बैठकर कंधार एयरपोर्ट से निकले और पाकिस्तान की सीमा से लगे इलाके में जा भागे।
तीन खूंखार आंतकवादियों को छोडने के एवज में IC-814 प्लेन के सभी यात्रियों को छोड़ दिया गया। लेकिन खुफिया एजेंसियां इस साजिश के तार पता करनें में जुटी थी। उन्हे पकड़ना था उन अपहरणकर्ताओं को जिन्होने इस गुनाह को अंजाम दिया था। जॉ़च एजेंसियों को विमान में बैठे यात्रियों से ये तो पता चल चुका था कि उनके नाम क्या थे। वो सभी अपहरणकर्ता एक दूसरे को कोडवर्ड से बुलाते थे। उनके मुखिया को चीफ कहा जाता था, तो एक को डाक्टर। दूसरे को बुलाया जाता था बर्गर के नाम से। एक का नाम शंकर था, तो एक का ऑटो। पॉचवे का नाम था भोला। लेकिन इसी बीच पाकिस्तान से आये एक फोन कॉल से खुफिया एंजेसियां उन सभी अपहरणकर्ताओ तक पहुंचने में कामयाब हो गई।
29 दिसम्बर1999... पाकिस्तान से वो फोन कॉल आया था मुंबई के रहने वाले अब्दुल लतीफ को। पाकिस्तान से फोन करने वाले शख्स ने अब्दुल लतीफ को आदेश दिया कि वो लंदन के अखबार को फोन कर धमकी दे कि अगर उनकी डिमांड को नही माना गया तो वो IC-814 विमान को बम से उड़ा देंगे। इस बातचीत को सुनते ही पुलिस ने अब्दुल लतीफ को धर-दबोचा। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने मोहम्मद रेहान, यूसुफ नेपाली और मोहम्मद इकबाल को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उन्होने बताया कि इस साजिश के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और हरकत उल मुजाहिदीन नाम के आंतकवादी संगठन का हाथ था।
IC-814 हाईजैकिंग मामले की तफ्तीश में साफ हो गया कि ये पूरी साजिश रची तो गई थी पाकिस्तान की खुफिया जॉच एजेंसी आईएसआई और हरकत उल मुजाहिदन ने। लेकिन इस साजिश को अमलीजामा पहनाया गया था काठमांडू में। पांचों हथियारबंद अपहरणकर्ता काठमांडू के त्रिभुवन एयरपोर्ट से ही विमान में चढ़े थे। आखिर हथियारबंद अपहरणकर्ता एयरपोर्ट में कैसे दाखिल हो गये और वो हथियार लेकर कैसे विमान में चढ़ गये थे। साफ था कि त्रिभुवन एयरपोर्ट पर उनकी अच्छे से तलाशी नहीं ली गई थी। कही ऐसा तो नहीं सुरक्षाकर्मी भी अपहरणकर्ताओ से मिले हुये थे।
करीब दस साल बाद IC-814 हाईजैकिंग मामले में पटियाला की विशेष अदालत ने अपहरण की साजिश में शामिल तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुये उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने IC-814 हाईजैकिंग की साजिश में शामिल रहे तीन आरोपियो को तो सजा सुना दी है लेकिन अभी इस अपहरणकांड के मास्टरमाइंड और वे पांचो शख्स जॉच एजेंसियों की पहुंच से दूर हैं जिन्होने विमान का अपहरण किया था और एक बेगुनाह, रुपेन कत्याल की हत्या की थी। इस हाईजैकिंग के बाद से पाकिस्तान समर्थित आंतकवादी संगठनों का हौसला बढ गया और उन्होने भारत के खिलाफ जंग को तेज कर दिया। वे समझ चुके थे पहले रुबिया अपहरण कांड (१९८९ में तत्कालीन केन्द्रीय गृहराज्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया के अपहरण के बदले में आंतकवादियों को छोड़ दिया गया) और फिर कंधार विमान हाईजैकिंग। सभी एक ओर इशारे कर रहे थे कि भारत कमजोर देश है और उसको डराने से आप मन-माफिक काम पूरे करा सकते हैं। लेकिन यहां एक बात गौर करने लायक है कि देश की पहले से ही नीति रही है कि चाहे कितने भी गुनाहगार छुट जायें लेकिन किसी बेगुनाह का खून नही बहना चाहिये—कंधार मामले में तो 180 यात्रियों की सुरक्षा का सवाल था।
हां ये बात जरुर है कि जिन लोगों के घर के सदस्य, रिश्तेदार और करीबी IC-814 प्लेन में मौजूद थे अगर वे सरकार के खिलाफ विरोध नही जताते और सीना तानकर बोलते कि हमारे करीबियों की परवाह मत करो, लेकिन आंतकवादियो के सामने घुटने किसी कीमत पर नही टेकना तो शायद देश की तस्वीर आज अलग होती।

3 टिप्‍पणियां:

crime ने कहा…

पढ़कर उस खौफनाक मंजर की याद ताजा हो गईं।

crime ने कहा…
इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
ashish ने कहा…

very nice information.
u r a unique writer who gives a whole picture of the incedent

ClickComments

जनमत

मेरी अलग-अलग पोस्ट पर लोगों की राय...

1. सर, आपके हर लेख में---आपके हर अनुभव का मिश्रण होता है--जो हर बार एक नई सीख देता है। पत्रकारिता में नए हैं पर बहुत कुछ सीखने की तमन्ना है। जहां तक ट्रैन वाले अंकलजी की बात है उसपर आपका जबाब बिल्कुल सही था कि ये तो हर फिल्ड में होता है और ये सही भी है। (मनोज एटलस, 9 अगस्त 2009 को 'आर्मी कभी मत ज्वाइन करना' में)

2. बहुत अच्छा लिखा है। अभी मीडिया में कैरियर की शुरुआत की है, पढ़ता हूं तो सीखने को बहुत कुछ मिलता है। (मनोज कुमार, 2 अगस्त 2009 को 'सरकार बनी, क्राइम रिपोर्टर खुश' में)

3. बहुत लंबी पोल खोली आपने दिल्ली के पत्रकारों की। (वर्षा, 14 मार्च 2009 को 'पत्रकारों का स्वागत कैसे करें', में)

4. पत्रकारों के सरकारी दामाद बनने के शौक के चलते ही मीडिया की और लोकतंत्र की यह दुर्दशा है। आलेख काफी लंबा था। समझ नहीं आया कि आप पत्रकार बिरादरी के साथ मनाने वाले दल के सदस्य के तौर पर थे ता डायरेक्टर साहब के मन की बात जानकर केवल उन्हीं की करतूतों की रिपोर्टिंग करने गये थे। उम्मीद है टिप्पणी प्रकाशित जरुर होगी। (सरिथा, 14 मार्च 2009 को 'पत्रकारों का स्वागत कैसे करें' में)

5. सही है भाई। अपनी बिरादरी के लोगों का गुनाह खुद ही कबूल करने की हिम्मत...काबिल-ए-तारीफ। बधाई। (चण्डीदत्त शुक्ल, 19 मार्च 2009 को 'पत्रकारों का स्वागत कैसे करें' में)

6. जितना रोचक ये संस्मरण है--उससे ज्यादा काबिले-तारीफ है आपकी स्मरण-शक्ति. बरसों पहले की गई कवरेज के आपको नाम-गाम और पते ठिकाने सब याद है. बधाई। एक बात तो आप भी मानेंगे बंधु कि दिल्लीवाले पत्रकार सरकारी मेहमान थे--लिहाजा वो स्तरीय ट्रीटमेंट के हकदार थे और उनके लिए सारे इंतजाम करना सरकार का कर्तव्य था--जहां तक मैं समझता हूं डायरेक्टर साहब भी इस बात को अच्छी तरह जानते थे। दिल्ली में बैठे पत्रकार कम नहीं हैं, तो भला दिल्ली में बैठा कोई अफसर इतना भोला कैसे हो सकता है...अगर सफर की शुरुआत में ही सीएम साहब के दरबार में सीधी दस्तक दे दी जाती, तो शर्तिया तौर पर इस परेशानी से बचा जा सकता था. (अशोक कौशिक, 29 मार्च 2009 को 'पत्रकारों का स्वागत कैसे करें' में)

7. बहुत रोचक आलेख. इतनी सारी जानकारी और तस्वीरें एक वृतांत में. आन्नद आ गया नीरज भाई. लिखते रहिए नियमित. (उडन तश्तरी, 23 फरवरी 2009 को 'हल्दीघाटी पीली नहीं लाल है' में)

8. नीरज भाई, आपने अदालत के फैसले को पढ़ा और आप इस खबर को शुरु से कवर करतें रहें हो, इसलिए आपके राईटअप में आपकी पकड़ दिख रही हैं...और बिल्कुल सही है कि ये बह्रामंड का सबसे क्रूरतम मानव है। शायद इनके लिए ये सजा कम है। अगर इससे भी बड़ी कोई सजा होती तो वो मिलनी चाहिए थी। (सुजीत कुमार, 15 फरवरी, 2009 को 'बह्रामण्ड का क्रूरतम मानव' में)

9. क्षमा चाहता हूं मैं आपसे और इस फैसले से सहमत नहीं हूं। इनसे भी ज्यादा क्रूर नरपिशाच है दुनिया में. वे जो इन्हे सरक्षंण देते है और जो इनके टुकड़ो पर पलते हैं. वे जो मारे जाने वाले निर्दोष लोगों के माननधिकारों की चिंता नहीं करते, पर निरीह लोगों को बेवजह मार देने नावे आतंकियों के मानवधिकारों की बात करते हैं. ऐसे लोग सिर्फ राजनेता ही नहीं हैं, कार्यपालिका, न्यायपालिका और यहां तक कि चौथे खम्बे और साहित्य में भी हैं. उनके बारे में क्या सोचते हैं आप ? (इष्ट देव सांकृत्यायन, 15 फरवरी 2009 को 'बह्रामण्ड का क्रूरतम मानव' में)

10. सोनू पंजाबन को इतना ग्लैमराइज क्यों कर दिया गया है. क्या और सोनू पंजाबने बनाने के लिए. (वर्षा, 24 नबम्बर 2008 को 'सीक्रेट डायरी ऑफ ए कॉल गर्ल' में)

11. A very intersting post on RTI. ( Sachin Agarwal , 11 October 2008 in 'आरटीआई वाला हत्यारा')

12. नीरज, बढिया लिखे हो। महिलाओं का योन शोषण नहीं होना चाहिये। लेकिन मैं बताउं जासूसी का खेल मर्यादा और कानूनी दायरे से बाहर होता है। इसके दायरे में रह कर जासूसी नहीं हो सकता। जासूसी के ट्रेनिंग के दौरान हीं जासुसों को बेहाया बना दिया जाता है। सेक्स का कोई मायने नहीं। जासूसी के खेल में सेक्स की जो भी कल्पना कर ले सभी प्रकार का खेल होता है। लेकिन अपने देश की रक्षा में। इसी के आड़ में कुछ अधिकारी अपने हीं महिला सदस्य के साथ ऐसा करे यह गलत है। (राजेश कुमार, 24 अगस्त 2008 को 'रॉ सेक्स स्कैंडल' में)

13. कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हैजरा तबियत से एक पत्थर तो उछालो यारों... आप खुद ही कह रहे हैं कि रॉ के बारे में किसी को कुछ भी नहीं पता चल सकता.. उसके अंदर परिंदा भी पर नहीं मार सकता... आप ये सब कुछ कहते हुए रॉ की तमाम अंदरूनी बातों को अपने ब्लाग से उजागर करते चले जा रहे हैं ... बहुत खूब..अच्छा तरीका है बखिया उधेड़ने का. (बेनामी, 3 सितम्बर 2008 को 'रॉ सेक्स स्कैंडल' में)

14. अच्छी जानकारी देने के लिए धन्यवाद. सुंदर लेख है...(विनीता, 20 अगस्त 2008 को 'सूरज अस्त, नेपाल मस्त' में)

15. thanx for ur travelogue! nice post! (Munish, 20 August 2008 in 'सूरज अस्त, नेपाल मस्त' में)

16. आपका पहला सफर तो 'हवा-हवाई'हो गया था लेकिन अब लगता है कि नेपाल में भी आपको कुछ रस मिलने लगा है तभी तो नेपाल की तारीफों के पुल बांधते नहीं थक रहे हैं.. कारण चाहे जो भी हो पर नेपाल है काफी अच्छी जगह.. अगर लुत्फ उठाना हो तो नेपाल से अच्छी जगह दुनिया में कोई नहीं.. लेकिन सर.. जरा संभल के, क्योकि चमकता जो नजर आता है सब सोना नही होता...(दीप चंद्र शुक्ल, 3 सितंबर 2008 को 'सूरज अस्त, नेपाल मस्त' में)

17. काफ़ी रोचक साक्षात्कार है ये.अच्छा लगा शोभराज के कई अनजाने पहलुओं को जानकर. (बालकिशन, 29 जुलाई 2008 को 'चार्ल्स शोभराज से खास बातचीत' में)

18. इतना व्यस्त रहने के बावजूद आप अपने ब्लॉग को दुरुस्त रखते हैं।यह चीज मुझे आपकी तारीफ करने को मजबूर कर रही है।कृपया इसे बनायें रखें।।।।आशा है अापके अनुभव समाज को आपराधिक प्रवृति को समझने में मदद करते रहेंगे।।।।।।।।।।।।। (मंयक, 7 जुलाई 2008 को 'बिकनी किलर की आशिकी' में)

19. यह जानकर खुशी हुई कि आप खबरों(विशेषकर इस खबर को लेकर)को टीआरपी के चश्में से नहीं देखते हैं।जैसा आपके अन्य साथियों देखते हैं।(मसाला मिल गया)आपका blog देखा तो comment करने की हिमाकत कर रहा हूँ।उम्मीद है आप इसी तरह खबरों के प्रति ईमानदार नजरिया रखेंगे। (मंयक, 9 जून 2008 को 'ब्लॉग के लिए टाइम नहीं मिला' में)

20. नीरज जी , आपका ब्लॉग गुनाहगार मैं लगातार देखता रहता हूँ ...अपराध पर अच्छी खबरें देखने को मिलती है ...जहाँ तक बहुचर्चित आरुषि हत्याकांड की बात है तो ...स्टार न्यूज़ पर अभी (देर रात बारह बजकर पचास मिनट पर) आपका ही फोनो देख रहा था .शायद खुलासा होने ही वाला है ...आज जैसा है रेणूका चौधरी ने कहा है की आरुषि पर फ़िल्म नहीं बनेगी ...अच्छी बात है ... (रामकृष्ण डोंगरे, 10 जून 2008 को 'ब्लॉग के लिए टाइम नहीं मिला' में)

21. नीरज, रोचक ब्लॉग है आपका। (हर्षवर्धन, 10 अप्रैल 2008 को 'जीनियस कॉल-गर्ल' में)

22. नीरज जी, आपका ब्लॉग आज पहली बार मैने पढ़ा है...काफी दिलचस्प था. मैं तूलिका सिंह हूं...सीएनईबी न्यूज चैनल में बतौर क्राइम रिपोर्टर काम कर रही हूं. आपको शायद याद होगा मैने बीएजी में काम किया है इंसाफ में जो कि बाद में बंद हो गया था। मै आपके ब्लॉग की सदस्य बना चाहती हूं और आपसे क्राइम रिपोर्टिंग सीखना चाहती हूं। प्लीज अपना नंबर मुझे मेल कर दीजिए. (तूलिका सिंह, 15 अप्रैल 2008 को 'जीनियस कॉल-गर्ल' में)

23. आलेख का शीर्षक(क्लाइंट नं 9)प्रभावित कर रहा है आलेख को पढने के लिए,अच्छा लगा..साथ ही आलेख के आखिर मे कंम्पयूटर के साथ स्पिटजर को भी वायरस,व्यंग्य का भी अहसास दे रहा है।इतना तो पता था कि आपकी कलम संपूर्ण भारतवर्ष के साथ नेपाल तक मार करती है,लेकिन आपकी तूलिका से लिखी सुदूर देश की कहानी बता रही है कि सारी दुनिया मे घूमती है आपकी कलम। (अभिनव उपाध्याय, 17 मार्च 2008 को 'CLIENT NO. 9 ' में)

24. very nice information.u r a unique writer who gives a whole picture of the incedent ( आशीष, 7 फरवरी 2008 को 'कंधार से पटियाला तक' में)

25. वाह!! मिर्जा का कच्चा चिटठा देने के लिए धन्यवाद (ईष्ट देव सांकृत्यायन, 27 दिसम्बर, 2007 को 'मिर्ज़ा ग़ालिब हाज़िर हो' में)

26. नीरज जी गालिब को आज आपने फिर से मेरे जेहन में जिंदा कर दिया, वरना गालिब को तो मैं भूलता ही जा रहा था, हजारो ख्वाहिशे ऐसी की हर ख्वाहिश पे दम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले (महर्षि, 27 दिसम्बर 2007 को 'मिर्ज़ा ग़ालिब हाज़िर हो' में)

27. क्या खूब थे तुम भी गालिब। तेरे नाम ने पहुँचाया गुनहगार तलक। (दिनेशराय द्विवेदी, 27 दिसम्बर 2007 को 'मिर्ज़ा ग़ालिब हाज़िर हो' में)

28. बहुत खूब मीर्ज़ा ग़ालिब की यह कहानी पढ़कर मज़ा आ गया. ब्लॉग को एक अलग रंग देने से अछा लगा. (वीर, 4 जनवरी, 2008 को 'मिर्ज़ा ग़ालिब हाज़िर हो' में)