06 अप्रैल, 2008

जीनियस कॉल-गर्ल


जब वो दस साल की हुई तो सभी उसकी बुद्धिमानी का लोहा मानने लगे। जिस यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लोग तरस जाते है, पूरी जिंदगी निकल जाती है, उसमें उसने महज तेरह साल की ही उम्र में दाखिला ले लिया था। उस वक्त उस छोटी सी लड़की को सभी बुलाते थे, मैथमेटिक्स जीनियस (MATHMATICS GENIUS) के नाम से। लेकिन पढा़ई पूरी करने के बाद जब वो दुनिया के सामने आई तो किसी को भी यकीन करना नामुमकिन था। वो दुनिया के लिये बन चुकी थी एक ‘जीनियस’ हाईप्रोफाईल कॉल-गर्ल।
दुनिया की सबसे बेहतरीन यूनिवर्सिटिज़ में शुमार ऑक्सफोर्ड में पढ़ना हर STUDENT का एक सपना होता है। यही सपना लेकर सोफिया नाम के उस लड़की ने भी करीब दस साल पहले इस विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया था। करीब 13 साल की उम्र में ही ऑक्सफोर्ड में दाखिला लेने वाली सोफिया सबसे कम उम्र की छात्रा थी। आप सोच रहे होंगे कि सोफिया अब एक विद्वान बन चुकी होगी। लेकिन आप को अपने कानों पर विश्वास करना मुश्किल हो जायेगा। क्योंकि सोफिया का नाम अब इंग्लैड़ की सबसे महंगी कॉल-गर्ल में शुमार हो चुका है। लोग उसे ‘शिल्पा ली’ के नाम से जानते है। इंटरेनट की एक सैक्स-साइट पर सोफिया ने जिस्मफरोशी का बाकायदा विज्ञापन दे रखा है। वेबसाइट के मुताबिक वो इंग्लैंड के सैलफोर्ड स्थित अपने फ्लैट से ये धंधा चलाती है। वेबसाइट पर पड़ी उसकी तस्वीरों को देखकर कोई भी यकीन कर सकता है कि वो पूरी तरह से वेश्यावृति के धंधे में लिप्त है।
कभी ऑक्सफोर्ड की MATHMATICS GENIUS रही सोफिया उर्फ शिल्पा ली पर अपने आप को सैक्सी एंड स्मार्ट कहलाना पसंद करती है। एक घंटे का वो अपने ग्राहको से 130 पाउंड वसूलती है। शिल्पा के मुताबिक अपने पारिवारिक वजह से वो इस सैक्स के इस गंदे धंधे में उतर गई है। शिल्पा के मुताबिक जब वो ऑक्सफोर्ड में पढ़ रही थी तो उसके पिता को दो नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण करने के चलते सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया था। इस घटना से वो अंदर से इस कदर टूट गई थी कि अपनी जिंदगी को संभालने के लिये उसने शादी भी रचाई। लेकिन कुछ ही दिनों में वो टूट गई। इन दोनों घटनाओं ने सोफियो को अंदर तक तोड़कर रख दिया। अपनी जिंदगी खुशगवार बनाने के लिये उसने जिस्मफरोशी का धंधा चुन लिया।
सोफिया उर्फ शिल्पा ली के ग्राहक भी जानते है कि वो गलत धंधे में पड़ गई है। शायद यही वजह है कि उसके एक ग्राहक ने उससे ये धंधा छोड़ने तक की गुहार लगाई है। सोफिया की वेबसाईट पर उस ग्राहक ने लिखा है “मुझे पूरा विश्वास है कि सोफिया इस बात से अच्छी तरह वाकिफ है कि उसने जो रास्ता अख्तियार किया है वो अच्छा नहीं है। जिंदगी को फिर से शुरु करने के लिये ये अच्छा करियर नहीं है। मुझे यकीन है कि उसने जिस्मफरोशी का धंधा जिंदगी से हताश हो कर चुन लिया है।”
जो दर्द सोफिया दुनिया को नहीं बता सकी, वो उसके एक ग्राहक ने लिखा है। बिना अपनी पहचान बताये उसके ग्राहक ने लिखा है-“सोफिया को इस धंधे को बंद कर देना चाहिये। एक इंसान होने के नाते उसे एक और मौका मिलना चाहिये। सोफिया को अपना शोषण बंद कर देना चाहिये। सोफिया तुम अपने भाई-बहनों को दिखा दो कि तुम इस कांटो भरी जिंदगी से उबर सकती हो।” मलेशिया की रहने वाली सोफिया उर्फ शिल्पा ली की कहानी जिसने भी सुनी, उसने ही अपील की है कि सोफिया उर्फ शिल्पा ली इस धंधे को छोड़कर एक नई जिंदगी की शुरुआत करे।

9 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

http://indianwomanhasarrived.blogspot.com/

Ghost Buster ने कहा…

thanks anonymous for this brilliant link.

हर्षवर्धन ने कहा…

नीरज, रोचक ब्लॉग है आपका।

tulika singh ने कहा…

niraj ji aapk ablog aaj pahli bar maine dekha hai ..... kafi dilchasp tha. mei tulika singh hu ... cneb news channel ami as criem reporter kam kar rahi hu . appko shayd yaad hoga maine bag mai bhi kam kiya hai inssaf mai jo ki baad mai band ho gaya.mai pake blog ki member banna chahti hu... aur aapse crime reporting bhi sikhna chati hu. plz apna number hume mail kar de.

neeraj rajput ने कहा…

TULIKA, THANX A LOT. JAB INSAAF PLAN HUA THA BAG FILMS MEI, I WAS IN ANOTHER ORGANISATION. ANYWAY ALL THE BEST FOR UR PROSPECTIVE CAREER. I HAV PUT MY MOBILE NO. ON MY BLOG (CRIME REPORTING SECTION). HOW CAN I HELP U OUT IN CRIME REPORTING. FEEL FREE TO CALL OR WRITE TO ME ON MY MAIL. THANX.

vir ने कहा…

Hey well done buddy!!!

Celulite ने कहा…

Hello. This post is likeable, and your blog is very interesting, congratulations :-). I will add in my blogroll =). If possible gives a last there on my blog, it is about the Celulite, I hope you enjoy. The address is http://eliminando-a-celulite.blogspot.com. A hug.

neeraj rajput ने कहा…

sorry, cellulite i could not found out ur blog. i have clicked on the address u have given, but its showing that blog has been removed.

mayank ने कहा…

आप जो लगातार blog को update करते है।वो अपराध और अपराध से जुडी जड को लोगों को समय-समय पर समझाने में मदद करते हैं जो कि प्रशंसनीय है।और इसी उम्मीद के साथ कि आप ऐसा करना जारी रखेंगे।आपको भविष्य के लिए शुभ कामनाऐं।

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जनमत

मेरी अलग-अलग पोस्ट पर लोगों की राय...

1. सर, आपके हर लेख में---आपके हर अनुभव का मिश्रण होता है--जो हर बार एक नई सीख देता है। पत्रकारिता में नए हैं पर बहुत कुछ सीखने की तमन्ना है। जहां तक ट्रैन वाले अंकलजी की बात है उसपर आपका जबाब बिल्कुल सही था कि ये तो हर फिल्ड में होता है और ये सही भी है। (मनोज एटलस, 9 अगस्त 2009 को 'आर्मी कभी मत ज्वाइन करना' में)

2. बहुत अच्छा लिखा है। अभी मीडिया में कैरियर की शुरुआत की है, पढ़ता हूं तो सीखने को बहुत कुछ मिलता है। (मनोज कुमार, 2 अगस्त 2009 को 'सरकार बनी, क्राइम रिपोर्टर खुश' में)

3. बहुत लंबी पोल खोली आपने दिल्ली के पत्रकारों की। (वर्षा, 14 मार्च 2009 को 'पत्रकारों का स्वागत कैसे करें', में)

4. पत्रकारों के सरकारी दामाद बनने के शौक के चलते ही मीडिया की और लोकतंत्र की यह दुर्दशा है। आलेख काफी लंबा था। समझ नहीं आया कि आप पत्रकार बिरादरी के साथ मनाने वाले दल के सदस्य के तौर पर थे ता डायरेक्टर साहब के मन की बात जानकर केवल उन्हीं की करतूतों की रिपोर्टिंग करने गये थे। उम्मीद है टिप्पणी प्रकाशित जरुर होगी। (सरिथा, 14 मार्च 2009 को 'पत्रकारों का स्वागत कैसे करें' में)

5. सही है भाई। अपनी बिरादरी के लोगों का गुनाह खुद ही कबूल करने की हिम्मत...काबिल-ए-तारीफ। बधाई। (चण्डीदत्त शुक्ल, 19 मार्च 2009 को 'पत्रकारों का स्वागत कैसे करें' में)

6. जितना रोचक ये संस्मरण है--उससे ज्यादा काबिले-तारीफ है आपकी स्मरण-शक्ति. बरसों पहले की गई कवरेज के आपको नाम-गाम और पते ठिकाने सब याद है. बधाई। एक बात तो आप भी मानेंगे बंधु कि दिल्लीवाले पत्रकार सरकारी मेहमान थे--लिहाजा वो स्तरीय ट्रीटमेंट के हकदार थे और उनके लिए सारे इंतजाम करना सरकार का कर्तव्य था--जहां तक मैं समझता हूं डायरेक्टर साहब भी इस बात को अच्छी तरह जानते थे। दिल्ली में बैठे पत्रकार कम नहीं हैं, तो भला दिल्ली में बैठा कोई अफसर इतना भोला कैसे हो सकता है...अगर सफर की शुरुआत में ही सीएम साहब के दरबार में सीधी दस्तक दे दी जाती, तो शर्तिया तौर पर इस परेशानी से बचा जा सकता था. (अशोक कौशिक, 29 मार्च 2009 को 'पत्रकारों का स्वागत कैसे करें' में)

7. बहुत रोचक आलेख. इतनी सारी जानकारी और तस्वीरें एक वृतांत में. आन्नद आ गया नीरज भाई. लिखते रहिए नियमित. (उडन तश्तरी, 23 फरवरी 2009 को 'हल्दीघाटी पीली नहीं लाल है' में)

8. नीरज भाई, आपने अदालत के फैसले को पढ़ा और आप इस खबर को शुरु से कवर करतें रहें हो, इसलिए आपके राईटअप में आपकी पकड़ दिख रही हैं...और बिल्कुल सही है कि ये बह्रामंड का सबसे क्रूरतम मानव है। शायद इनके लिए ये सजा कम है। अगर इससे भी बड़ी कोई सजा होती तो वो मिलनी चाहिए थी। (सुजीत कुमार, 15 फरवरी, 2009 को 'बह्रामण्ड का क्रूरतम मानव' में)

9. क्षमा चाहता हूं मैं आपसे और इस फैसले से सहमत नहीं हूं। इनसे भी ज्यादा क्रूर नरपिशाच है दुनिया में. वे जो इन्हे सरक्षंण देते है और जो इनके टुकड़ो पर पलते हैं. वे जो मारे जाने वाले निर्दोष लोगों के माननधिकारों की चिंता नहीं करते, पर निरीह लोगों को बेवजह मार देने नावे आतंकियों के मानवधिकारों की बात करते हैं. ऐसे लोग सिर्फ राजनेता ही नहीं हैं, कार्यपालिका, न्यायपालिका और यहां तक कि चौथे खम्बे और साहित्य में भी हैं. उनके बारे में क्या सोचते हैं आप ? (इष्ट देव सांकृत्यायन, 15 फरवरी 2009 को 'बह्रामण्ड का क्रूरतम मानव' में)

10. सोनू पंजाबन को इतना ग्लैमराइज क्यों कर दिया गया है. क्या और सोनू पंजाबने बनाने के लिए. (वर्षा, 24 नबम्बर 2008 को 'सीक्रेट डायरी ऑफ ए कॉल गर्ल' में)

11. A very intersting post on RTI. ( Sachin Agarwal , 11 October 2008 in 'आरटीआई वाला हत्यारा')

12. नीरज, बढिया लिखे हो। महिलाओं का योन शोषण नहीं होना चाहिये। लेकिन मैं बताउं जासूसी का खेल मर्यादा और कानूनी दायरे से बाहर होता है। इसके दायरे में रह कर जासूसी नहीं हो सकता। जासूसी के ट्रेनिंग के दौरान हीं जासुसों को बेहाया बना दिया जाता है। सेक्स का कोई मायने नहीं। जासूसी के खेल में सेक्स की जो भी कल्पना कर ले सभी प्रकार का खेल होता है। लेकिन अपने देश की रक्षा में। इसी के आड़ में कुछ अधिकारी अपने हीं महिला सदस्य के साथ ऐसा करे यह गलत है। (राजेश कुमार, 24 अगस्त 2008 को 'रॉ सेक्स स्कैंडल' में)

13. कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हैजरा तबियत से एक पत्थर तो उछालो यारों... आप खुद ही कह रहे हैं कि रॉ के बारे में किसी को कुछ भी नहीं पता चल सकता.. उसके अंदर परिंदा भी पर नहीं मार सकता... आप ये सब कुछ कहते हुए रॉ की तमाम अंदरूनी बातों को अपने ब्लाग से उजागर करते चले जा रहे हैं ... बहुत खूब..अच्छा तरीका है बखिया उधेड़ने का. (बेनामी, 3 सितम्बर 2008 को 'रॉ सेक्स स्कैंडल' में)

14. अच्छी जानकारी देने के लिए धन्यवाद. सुंदर लेख है...(विनीता, 20 अगस्त 2008 को 'सूरज अस्त, नेपाल मस्त' में)

15. thanx for ur travelogue! nice post! (Munish, 20 August 2008 in 'सूरज अस्त, नेपाल मस्त' में)

16. आपका पहला सफर तो 'हवा-हवाई'हो गया था लेकिन अब लगता है कि नेपाल में भी आपको कुछ रस मिलने लगा है तभी तो नेपाल की तारीफों के पुल बांधते नहीं थक रहे हैं.. कारण चाहे जो भी हो पर नेपाल है काफी अच्छी जगह.. अगर लुत्फ उठाना हो तो नेपाल से अच्छी जगह दुनिया में कोई नहीं.. लेकिन सर.. जरा संभल के, क्योकि चमकता जो नजर आता है सब सोना नही होता...(दीप चंद्र शुक्ल, 3 सितंबर 2008 को 'सूरज अस्त, नेपाल मस्त' में)

17. काफ़ी रोचक साक्षात्कार है ये.अच्छा लगा शोभराज के कई अनजाने पहलुओं को जानकर. (बालकिशन, 29 जुलाई 2008 को 'चार्ल्स शोभराज से खास बातचीत' में)

18. इतना व्यस्त रहने के बावजूद आप अपने ब्लॉग को दुरुस्त रखते हैं।यह चीज मुझे आपकी तारीफ करने को मजबूर कर रही है।कृपया इसे बनायें रखें।।।।आशा है अापके अनुभव समाज को आपराधिक प्रवृति को समझने में मदद करते रहेंगे।।।।।।।।।।।।। (मंयक, 7 जुलाई 2008 को 'बिकनी किलर की आशिकी' में)

19. यह जानकर खुशी हुई कि आप खबरों(विशेषकर इस खबर को लेकर)को टीआरपी के चश्में से नहीं देखते हैं।जैसा आपके अन्य साथियों देखते हैं।(मसाला मिल गया)आपका blog देखा तो comment करने की हिमाकत कर रहा हूँ।उम्मीद है आप इसी तरह खबरों के प्रति ईमानदार नजरिया रखेंगे। (मंयक, 9 जून 2008 को 'ब्लॉग के लिए टाइम नहीं मिला' में)

20. नीरज जी , आपका ब्लॉग गुनाहगार मैं लगातार देखता रहता हूँ ...अपराध पर अच्छी खबरें देखने को मिलती है ...जहाँ तक बहुचर्चित आरुषि हत्याकांड की बात है तो ...स्टार न्यूज़ पर अभी (देर रात बारह बजकर पचास मिनट पर) आपका ही फोनो देख रहा था .शायद खुलासा होने ही वाला है ...आज जैसा है रेणूका चौधरी ने कहा है की आरुषि पर फ़िल्म नहीं बनेगी ...अच्छी बात है ... (रामकृष्ण डोंगरे, 10 जून 2008 को 'ब्लॉग के लिए टाइम नहीं मिला' में)

21. नीरज, रोचक ब्लॉग है आपका। (हर्षवर्धन, 10 अप्रैल 2008 को 'जीनियस कॉल-गर्ल' में)

22. नीरज जी, आपका ब्लॉग आज पहली बार मैने पढ़ा है...काफी दिलचस्प था. मैं तूलिका सिंह हूं...सीएनईबी न्यूज चैनल में बतौर क्राइम रिपोर्टर काम कर रही हूं. आपको शायद याद होगा मैने बीएजी में काम किया है इंसाफ में जो कि बाद में बंद हो गया था। मै आपके ब्लॉग की सदस्य बना चाहती हूं और आपसे क्राइम रिपोर्टिंग सीखना चाहती हूं। प्लीज अपना नंबर मुझे मेल कर दीजिए. (तूलिका सिंह, 15 अप्रैल 2008 को 'जीनियस कॉल-गर्ल' में)

23. आलेख का शीर्षक(क्लाइंट नं 9)प्रभावित कर रहा है आलेख को पढने के लिए,अच्छा लगा..साथ ही आलेख के आखिर मे कंम्पयूटर के साथ स्पिटजर को भी वायरस,व्यंग्य का भी अहसास दे रहा है।इतना तो पता था कि आपकी कलम संपूर्ण भारतवर्ष के साथ नेपाल तक मार करती है,लेकिन आपकी तूलिका से लिखी सुदूर देश की कहानी बता रही है कि सारी दुनिया मे घूमती है आपकी कलम। (अभिनव उपाध्याय, 17 मार्च 2008 को 'CLIENT NO. 9 ' में)

24. very nice information.u r a unique writer who gives a whole picture of the incedent ( आशीष, 7 फरवरी 2008 को 'कंधार से पटियाला तक' में)

25. वाह!! मिर्जा का कच्चा चिटठा देने के लिए धन्यवाद (ईष्ट देव सांकृत्यायन, 27 दिसम्बर, 2007 को 'मिर्ज़ा ग़ालिब हाज़िर हो' में)

26. नीरज जी गालिब को आज आपने फिर से मेरे जेहन में जिंदा कर दिया, वरना गालिब को तो मैं भूलता ही जा रहा था, हजारो ख्वाहिशे ऐसी की हर ख्वाहिश पे दम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले (महर्षि, 27 दिसम्बर 2007 को 'मिर्ज़ा ग़ालिब हाज़िर हो' में)

27. क्या खूब थे तुम भी गालिब। तेरे नाम ने पहुँचाया गुनहगार तलक। (दिनेशराय द्विवेदी, 27 दिसम्बर 2007 को 'मिर्ज़ा ग़ालिब हाज़िर हो' में)

28. बहुत खूब मीर्ज़ा ग़ालिब की यह कहानी पढ़कर मज़ा आ गया. ब्लॉग को एक अलग रंग देने से अछा लगा. (वीर, 4 जनवरी, 2008 को 'मिर्ज़ा ग़ालिब हाज़िर हो' में)