05 जुलाई, 2008

बिकनी किलर की आशिकी


चार्ल्स शोभराज में मुझे कोई बुराई नजर नहीं आई। उनकी आंखें मेरे ऊपर ठहर गईं। मैं जानती थी कि उन्हें मुझसे प्यार हो गया है। मैं भी उन्हें चाहने लगी...एक अमेरिकी सैलानी की हत्या के आरोप में नेपाल में बंद कुख्यात अपराधी चार्ल्स शोभराज इन दिनों अपनी आशिकी के कारण चर्चा में है। 64 वर्षीय शोभराज, 20 वर्ष की एक नेपाली लड़की निहिता बिस्वास से आशिकी कर रहा है। दोनों एक-दूसरे पर फिदा हैं और लड़की की मां को इस रिश्ते से कोई ऐतराज नहीं है।
निहिता ने हाल ही में स्कूली पढ़ाई पूरी की है और वह राजनीतिक संवाददाता बनना चाहती है। निहिता एक बंगाली पिता और नेपाली मां की पुत्री है। तीन महीने पहले निहिता की मुलाकात जेल में बंद शोभराज से हुई थी। शोभराज को एक द्विभाषिए और गाइड की जरूरत थी। किसी व्यक्ति ने तब निहिता का परिचय शोभराज से कराया। खबर है शोभराज को पहली ही मुलाकात में निहिता से इश्क हो गया।
इस बारे में निहिता कहती है, “शोभराज में मुझे कोई बुराई नजर नहीं आई। उनकी आंखें मेरे ऊपर ठहर गईं। मैं जानती थी कि उन्हें मुझसे प्यार हो गया है। मैं भी उन्हें चाहने लगी”। इसके बाद निहिता नियमित रूप से जेल का चक्कर लगाने लगी। बात यहां तक बढ़ी कि दोनों साथ-साथ खाना भी खाने लगे और भविष्य की योजना बनाने लगे। निहिता ने अपनी मां को इस प्यार के बारे में बताया और जेल में शोभराज से उनकी मुलाकात भी कराई।
निहिता की मां ने कहा, “मैं मानवाधिकार कार्यकर्ता हूं। मुझे मालूम है कि शोभराज को बिना सबूत के फंसाया गया है”।
निहिता और शोभराज की सगाई भी हो चुकी है। निहिता को उम्मीद है कि शोभराज मुक्त हो जाएगा और उसे अपने सपनों के इस राजकुमार के साथ घर बसाने का मौका मिलेगा।
लेकिन जो लोग शोभराज को जानते हैं....वो ये भी जानते हैं कि इस शख्स की जिंदगी में न जाने कितनी खूबसूरत लड़कियां आईं और चली गईं...और बार-बार प्यार का बंधन तोड़कर आजाद हो गया ये बिकनी किलर। इस बार भी लोग ये सोच रहे हैं। दोनों के बीच का ये रिश्ता कैसा होगा? शोभराज की उम्र और निहिता की उम्र के बीच चालीस साल से ज्यादा का फासला है। बीस साल की मोहब्बत में कैद 64 साल का आशिक। क्या ये वो निशब्द रिश्ता है...जिसे हम फिल्मों में देखते और सुनते आए हैं।
चार्ल्स शोभराज किलर है। वो ठग है। वो स्मगलर है। वो ज्वेलथीफ है....और वो है दुनिया का सबसे चालाक हत्यारा। उससे भी ज्यादा वो है लड़कियों का दीवाना। लेकिन अब तक जो भी लड़की उसकी जिंदगी के करीब आया, उसे मिली मौत। ये हम नहीं तमाम देशों के पुलिस रिकार्ड कह रहे हैं, जहां इस नटवरलाल ने लड़कियों का किया है कत्ल।
लड़कियों के कत्ल की इन कहानियों से ही ये दुनिया में बिकनी किलर के नाम से कुख्यात हुआ है। अब इसकी जिंदगी में आई है निहिता विश्वास। प्यार के एक नए अंदाज और नए तेवर के साथ। अब दुनिया जानना चाहती है गुनाह के गॉडफादर की इस प्रेमकहानी का क्या होगा अंजांम?

अगर गुनाह का गॉडफादर नेपाल की जेल से छूट भी गया, तो थाइलैंड की जेल को है उसका इंतजार। शोभराज के सभी गुनाह अगर अदालत में साबित हो जाएं और उसे कम से कम दो सौ चालीस साल की सजा मिलेगी। यानी जितनी उम्र है उससे चार गुनी सजा। ऐसे में प्यार की इस कहानी की उम्र कितनी होगी। वाकई लोग इसे जानना चाहेंगे। लेकिन इस खबर के बाद नेपाल में शोभराज पर पहरे बढ़ा दिए गए हैं और निहिता को उससे मुलाकात की इजाजत नहीं दी जा रही। ( न्यूज एजेंसी आईएएनएस से साभार)

5 टिप्‍पणियां:

Lovely kumari ने कहा…

logon ka dimag kaise kharab ho jata hai,kya yah pyar ho sakta hai,nisandeh nahi.

Som ने कहा…

It looks like publicity stunt by Shobhraj. He is using his money power to wield influece over Nepalese security system and enjoying facilities of VIP prisoner.

I was searching some news article on this topic and found your post very interesting. I love to read Blogs in Hindi.

mayank ने कहा…

मेरे विचार से निहिता का इसमें अपना कुछ निहित स्वार्थ है।अन्यथा वास्तविक धरातल में इस कहानी को पचा पाना मुश्किल है।एक नवयौवना का अपनी उम्र से काफी बडे शख्स के साथ संबंध, सस्ता प्रचार पाने का तरीका भर है,हकीकत नहीं..............

mayank ने कहा…

इतना व्यस्त रहने के बावजूद आप अपने ब्लॉग को दुरुस्त रखते हैं।यह चीज मुझे आपकी तारीफ करने को मजबूर कर रही है।कृपया इसे बनायें रखें।।।।आशा है अापके अनुभव समाज को आपराधिक प्रवृति को समझने में मदद करते रहेंगे।।।।।।।।।।।।।

Manojeet Singh ने कहा…

Respected Neeraj Sir,
apka blog read kar kafi acha aur rochak laga. Bikni killer ke bare me jo batien likhi gai hain wo kafi rochak aur san sani khej hain..ku na aap ek programme banaye jis-se aj kal ke logoo ko uske bare me aur jyada jankari mile...pipe line me kam to nahi chal raha hai...?i hope jaldi hi aur koi san sani khej story ake dwara milegi...my best wishes with you...

regards
Manoj Singh
Journalist

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जनमत

मेरी अलग-अलग पोस्ट पर लोगों की राय...

1. सर, आपके हर लेख में---आपके हर अनुभव का मिश्रण होता है--जो हर बार एक नई सीख देता है। पत्रकारिता में नए हैं पर बहुत कुछ सीखने की तमन्ना है। जहां तक ट्रैन वाले अंकलजी की बात है उसपर आपका जबाब बिल्कुल सही था कि ये तो हर फिल्ड में होता है और ये सही भी है। (मनोज एटलस, 9 अगस्त 2009 को 'आर्मी कभी मत ज्वाइन करना' में)

2. बहुत अच्छा लिखा है। अभी मीडिया में कैरियर की शुरुआत की है, पढ़ता हूं तो सीखने को बहुत कुछ मिलता है। (मनोज कुमार, 2 अगस्त 2009 को 'सरकार बनी, क्राइम रिपोर्टर खुश' में)

3. बहुत लंबी पोल खोली आपने दिल्ली के पत्रकारों की। (वर्षा, 14 मार्च 2009 को 'पत्रकारों का स्वागत कैसे करें', में)

4. पत्रकारों के सरकारी दामाद बनने के शौक के चलते ही मीडिया की और लोकतंत्र की यह दुर्दशा है। आलेख काफी लंबा था। समझ नहीं आया कि आप पत्रकार बिरादरी के साथ मनाने वाले दल के सदस्य के तौर पर थे ता डायरेक्टर साहब के मन की बात जानकर केवल उन्हीं की करतूतों की रिपोर्टिंग करने गये थे। उम्मीद है टिप्पणी प्रकाशित जरुर होगी। (सरिथा, 14 मार्च 2009 को 'पत्रकारों का स्वागत कैसे करें' में)

5. सही है भाई। अपनी बिरादरी के लोगों का गुनाह खुद ही कबूल करने की हिम्मत...काबिल-ए-तारीफ। बधाई। (चण्डीदत्त शुक्ल, 19 मार्च 2009 को 'पत्रकारों का स्वागत कैसे करें' में)

6. जितना रोचक ये संस्मरण है--उससे ज्यादा काबिले-तारीफ है आपकी स्मरण-शक्ति. बरसों पहले की गई कवरेज के आपको नाम-गाम और पते ठिकाने सब याद है. बधाई। एक बात तो आप भी मानेंगे बंधु कि दिल्लीवाले पत्रकार सरकारी मेहमान थे--लिहाजा वो स्तरीय ट्रीटमेंट के हकदार थे और उनके लिए सारे इंतजाम करना सरकार का कर्तव्य था--जहां तक मैं समझता हूं डायरेक्टर साहब भी इस बात को अच्छी तरह जानते थे। दिल्ली में बैठे पत्रकार कम नहीं हैं, तो भला दिल्ली में बैठा कोई अफसर इतना भोला कैसे हो सकता है...अगर सफर की शुरुआत में ही सीएम साहब के दरबार में सीधी दस्तक दे दी जाती, तो शर्तिया तौर पर इस परेशानी से बचा जा सकता था. (अशोक कौशिक, 29 मार्च 2009 को 'पत्रकारों का स्वागत कैसे करें' में)

7. बहुत रोचक आलेख. इतनी सारी जानकारी और तस्वीरें एक वृतांत में. आन्नद आ गया नीरज भाई. लिखते रहिए नियमित. (उडन तश्तरी, 23 फरवरी 2009 को 'हल्दीघाटी पीली नहीं लाल है' में)

8. नीरज भाई, आपने अदालत के फैसले को पढ़ा और आप इस खबर को शुरु से कवर करतें रहें हो, इसलिए आपके राईटअप में आपकी पकड़ दिख रही हैं...और बिल्कुल सही है कि ये बह्रामंड का सबसे क्रूरतम मानव है। शायद इनके लिए ये सजा कम है। अगर इससे भी बड़ी कोई सजा होती तो वो मिलनी चाहिए थी। (सुजीत कुमार, 15 फरवरी, 2009 को 'बह्रामण्ड का क्रूरतम मानव' में)

9. क्षमा चाहता हूं मैं आपसे और इस फैसले से सहमत नहीं हूं। इनसे भी ज्यादा क्रूर नरपिशाच है दुनिया में. वे जो इन्हे सरक्षंण देते है और जो इनके टुकड़ो पर पलते हैं. वे जो मारे जाने वाले निर्दोष लोगों के माननधिकारों की चिंता नहीं करते, पर निरीह लोगों को बेवजह मार देने नावे आतंकियों के मानवधिकारों की बात करते हैं. ऐसे लोग सिर्फ राजनेता ही नहीं हैं, कार्यपालिका, न्यायपालिका और यहां तक कि चौथे खम्बे और साहित्य में भी हैं. उनके बारे में क्या सोचते हैं आप ? (इष्ट देव सांकृत्यायन, 15 फरवरी 2009 को 'बह्रामण्ड का क्रूरतम मानव' में)

10. सोनू पंजाबन को इतना ग्लैमराइज क्यों कर दिया गया है. क्या और सोनू पंजाबने बनाने के लिए. (वर्षा, 24 नबम्बर 2008 को 'सीक्रेट डायरी ऑफ ए कॉल गर्ल' में)

11. A very intersting post on RTI. ( Sachin Agarwal , 11 October 2008 in 'आरटीआई वाला हत्यारा')

12. नीरज, बढिया लिखे हो। महिलाओं का योन शोषण नहीं होना चाहिये। लेकिन मैं बताउं जासूसी का खेल मर्यादा और कानूनी दायरे से बाहर होता है। इसके दायरे में रह कर जासूसी नहीं हो सकता। जासूसी के ट्रेनिंग के दौरान हीं जासुसों को बेहाया बना दिया जाता है। सेक्स का कोई मायने नहीं। जासूसी के खेल में सेक्स की जो भी कल्पना कर ले सभी प्रकार का खेल होता है। लेकिन अपने देश की रक्षा में। इसी के आड़ में कुछ अधिकारी अपने हीं महिला सदस्य के साथ ऐसा करे यह गलत है। (राजेश कुमार, 24 अगस्त 2008 को 'रॉ सेक्स स्कैंडल' में)

13. कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हैजरा तबियत से एक पत्थर तो उछालो यारों... आप खुद ही कह रहे हैं कि रॉ के बारे में किसी को कुछ भी नहीं पता चल सकता.. उसके अंदर परिंदा भी पर नहीं मार सकता... आप ये सब कुछ कहते हुए रॉ की तमाम अंदरूनी बातों को अपने ब्लाग से उजागर करते चले जा रहे हैं ... बहुत खूब..अच्छा तरीका है बखिया उधेड़ने का. (बेनामी, 3 सितम्बर 2008 को 'रॉ सेक्स स्कैंडल' में)

14. अच्छी जानकारी देने के लिए धन्यवाद. सुंदर लेख है...(विनीता, 20 अगस्त 2008 को 'सूरज अस्त, नेपाल मस्त' में)

15. thanx for ur travelogue! nice post! (Munish, 20 August 2008 in 'सूरज अस्त, नेपाल मस्त' में)

16. आपका पहला सफर तो 'हवा-हवाई'हो गया था लेकिन अब लगता है कि नेपाल में भी आपको कुछ रस मिलने लगा है तभी तो नेपाल की तारीफों के पुल बांधते नहीं थक रहे हैं.. कारण चाहे जो भी हो पर नेपाल है काफी अच्छी जगह.. अगर लुत्फ उठाना हो तो नेपाल से अच्छी जगह दुनिया में कोई नहीं.. लेकिन सर.. जरा संभल के, क्योकि चमकता जो नजर आता है सब सोना नही होता...(दीप चंद्र शुक्ल, 3 सितंबर 2008 को 'सूरज अस्त, नेपाल मस्त' में)

17. काफ़ी रोचक साक्षात्कार है ये.अच्छा लगा शोभराज के कई अनजाने पहलुओं को जानकर. (बालकिशन, 29 जुलाई 2008 को 'चार्ल्स शोभराज से खास बातचीत' में)

18. इतना व्यस्त रहने के बावजूद आप अपने ब्लॉग को दुरुस्त रखते हैं।यह चीज मुझे आपकी तारीफ करने को मजबूर कर रही है।कृपया इसे बनायें रखें।।।।आशा है अापके अनुभव समाज को आपराधिक प्रवृति को समझने में मदद करते रहेंगे।।।।।।।।।।।।। (मंयक, 7 जुलाई 2008 को 'बिकनी किलर की आशिकी' में)

19. यह जानकर खुशी हुई कि आप खबरों(विशेषकर इस खबर को लेकर)को टीआरपी के चश्में से नहीं देखते हैं।जैसा आपके अन्य साथियों देखते हैं।(मसाला मिल गया)आपका blog देखा तो comment करने की हिमाकत कर रहा हूँ।उम्मीद है आप इसी तरह खबरों के प्रति ईमानदार नजरिया रखेंगे। (मंयक, 9 जून 2008 को 'ब्लॉग के लिए टाइम नहीं मिला' में)

20. नीरज जी , आपका ब्लॉग गुनाहगार मैं लगातार देखता रहता हूँ ...अपराध पर अच्छी खबरें देखने को मिलती है ...जहाँ तक बहुचर्चित आरुषि हत्याकांड की बात है तो ...स्टार न्यूज़ पर अभी (देर रात बारह बजकर पचास मिनट पर) आपका ही फोनो देख रहा था .शायद खुलासा होने ही वाला है ...आज जैसा है रेणूका चौधरी ने कहा है की आरुषि पर फ़िल्म नहीं बनेगी ...अच्छी बात है ... (रामकृष्ण डोंगरे, 10 जून 2008 को 'ब्लॉग के लिए टाइम नहीं मिला' में)

21. नीरज, रोचक ब्लॉग है आपका। (हर्षवर्धन, 10 अप्रैल 2008 को 'जीनियस कॉल-गर्ल' में)

22. नीरज जी, आपका ब्लॉग आज पहली बार मैने पढ़ा है...काफी दिलचस्प था. मैं तूलिका सिंह हूं...सीएनईबी न्यूज चैनल में बतौर क्राइम रिपोर्टर काम कर रही हूं. आपको शायद याद होगा मैने बीएजी में काम किया है इंसाफ में जो कि बाद में बंद हो गया था। मै आपके ब्लॉग की सदस्य बना चाहती हूं और आपसे क्राइम रिपोर्टिंग सीखना चाहती हूं। प्लीज अपना नंबर मुझे मेल कर दीजिए. (तूलिका सिंह, 15 अप्रैल 2008 को 'जीनियस कॉल-गर्ल' में)

23. आलेख का शीर्षक(क्लाइंट नं 9)प्रभावित कर रहा है आलेख को पढने के लिए,अच्छा लगा..साथ ही आलेख के आखिर मे कंम्पयूटर के साथ स्पिटजर को भी वायरस,व्यंग्य का भी अहसास दे रहा है।इतना तो पता था कि आपकी कलम संपूर्ण भारतवर्ष के साथ नेपाल तक मार करती है,लेकिन आपकी तूलिका से लिखी सुदूर देश की कहानी बता रही है कि सारी दुनिया मे घूमती है आपकी कलम। (अभिनव उपाध्याय, 17 मार्च 2008 को 'CLIENT NO. 9 ' में)

24. very nice information.u r a unique writer who gives a whole picture of the incedent ( आशीष, 7 फरवरी 2008 को 'कंधार से पटियाला तक' में)

25. वाह!! मिर्जा का कच्चा चिटठा देने के लिए धन्यवाद (ईष्ट देव सांकृत्यायन, 27 दिसम्बर, 2007 को 'मिर्ज़ा ग़ालिब हाज़िर हो' में)

26. नीरज जी गालिब को आज आपने फिर से मेरे जेहन में जिंदा कर दिया, वरना गालिब को तो मैं भूलता ही जा रहा था, हजारो ख्वाहिशे ऐसी की हर ख्वाहिश पे दम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले (महर्षि, 27 दिसम्बर 2007 को 'मिर्ज़ा ग़ालिब हाज़िर हो' में)

27. क्या खूब थे तुम भी गालिब। तेरे नाम ने पहुँचाया गुनहगार तलक। (दिनेशराय द्विवेदी, 27 दिसम्बर 2007 को 'मिर्ज़ा ग़ालिब हाज़िर हो' में)

28. बहुत खूब मीर्ज़ा ग़ालिब की यह कहानी पढ़कर मज़ा आ गया. ब्लॉग को एक अलग रंग देने से अछा लगा. (वीर, 4 जनवरी, 2008 को 'मिर्ज़ा ग़ालिब हाज़िर हो' में)