
तिहाड़ जेल में बंद एक बलात्कारी, सूचना के अधिकार (यानि आरटीआई) को हथियार बनाकर दिल्ली पुलिस की खाट खड़ी करनी की तैयारी में जुटा था। वो अपने आप को बेगुनाह साबित करने के लिये एक आम शहरी की ही तरह राजधानी दिल्ली के कश्मीरी गेट थाने से आरटीआई के तहत एक जानकारी इकठ्ठा करना चाहता था। लेकिन जबतक उसे सूचना प्राप्त होती, वो बलात्कारी के साथ-साथ बन गया तीन बेकसूर लोगों का हत्यारा।
तिहाड़ जेल में बंद था राजधानी के मोतिया खान इलाके का एक प्रॉपर्टी डीलर के के सेठ। इल्ज़ाम था एक मासूम लड़की की अस्मत लूटने का। इस गुनाह में अपने पति की सहभागी बनने वाली के के सेठ की पत्नी, उषा को भी जेल भेजा गया था। लिहाजा दोनों पति पत्नी जेल की सलाखों के पीछे ही थे कि एक दिन के के सेठ अखबार के पन्ने पलट रहा था कि उसकी नजर एक इश्तेहारे-शोरे-गोगा (अपील) पर पड़ी। कश्मीरी गेट थाने ने अखबार में एक अज्ञात महिला की लाश की पहचान के लिये जनता से मदद मांगी थी। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उस महिला के हाथ पर ‘वजीरो’ लिखा था। यानि महिला का नाम (वजीरो) तो पुलिस को पता था लेकिन उसके अलावा पुलिस को उसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उसकी लाश कुछ दिनों पहले कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास एक बक्से में पड़ी मिली थी। तब से ही पुलिस उस महिला की पहचान और उसके कातिल को तलाश कर रही थी।
जेल में बंद के के सेठ ने जैसे ही पुलिस के विज्ञापन को पढ़ा, वो बलात्कार के मामले में खुद को बेगुनाह साबित करने में जुट गया। के के सेठ ने पुलिस से आरटीआई के तहत मामले की तफ्तीश के बारे में पता करने की कोशिश की।
जेल में बंद के के सेठ ने जैसे ही पुलिस के विज्ञापन को पढ़ा, कि बलात्कार के मामले में खुद को बेगुनाह साबित करने में जुट गया। के के सेठ ने पुलिस से आरटीआई के तहत मामले की तफ्तीश के बारे में पता करने की कोशिश की। पहली बार तो पुलिस ने उसकी अपील ये कहते हुये खारिज कर दी कि वजीरो नाम की महिला के हत्यारों का कोई अता-पता नहीं चला है। लेकिन के के सेठ कहां चुप बैठने वाला था। उसके कुछ महीनों बाद एक बार फिर आईटीआई लगा दी पुलिस के आला-अधिकारियों के दरबार में। इस बार पुलिस ने के के सेठ से पूछताछ करने का मन बनाया। सो पहुंच गये तिहाड़ जेल कि भई उसे इस अज्ञात लाश की तफ्तीश में इतनी दिलचस्पी क्यों है ? के के सेठ ने बताया कि जिस वजीरो नाम की महिला की लाश कश्मीरी गेट इलाके में पड़ी मिली है, उसी की बेटी के बलात्कार के इल्जाम में ही वो जेल में हवा खा रहा है। उसने बताया कि जिस शख्स ने वजीरो की हत्या की है उसी ने वजीरो की बेटी की आबरु लूटी है। उसने अपने बेगुनाह होने की दलील भी पुलिस के सामने रख दी। इस खुलासे के बाद तो मानों पुलिस को वजीरो की हत्या की तफ्तीश में दिशा मिलती दिखाई पड़ी।पुलिस अब वजीरो की बेटी की तलाश में जुट गई। पता चला कि वजीरो की बेटी इनदिनों अपने पति के साथ हरियाणा के रेवाड़ी शहर में रहती है। वजीरो की बेटी ने जो कुछ बताया, उसके आधार पर पुलिस ने कड़ी से कड़ी मिलानी शुरु कर दी।
पूरा मामला शीशे की तरह साफ हो चुका था। पुलिस ने जिस शख्स की मदद से वजीरो की हत्या का मामला खोल दिया था वही था कत्ल का असल हत्यारा यानि कि के के सेठ। पुलिस ने वजीरो और उसके दो मासूम बेटो की हत्या के आरोप में भी के के सेठ को गिरफ्तार कर लिया। पूरा मामला कुछ यूं था...राजधानी के सीलमपुर इलाके में वजीरो नाम की एक गरीब महिला अपने नाबालिग बेटी और दो बेटों के साथ रहती थी। पेट भरने के लिये चारो बंग्लासाहिब गुरुद्वारे जाते थे। एक रोज उनकी मुलाकात प्रॉपर्टी डीलर के के सेठ और उनकी पत्नी उषा से हुई। दोनों ने अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों में वजीरो को फंसा लिया और अपने घर ले आए। एक दिन वजीरो की बेटी सो कर उठी तो उसने पाया कि उसकी मां और दोनो भाई घर पर नहीं हैं।
लड़की ने अपनी मां और भाईयों के बारे में के के सेठ और उषा से पता किया, तो दोनों ने बताया कि वजीरो ने उसे 75 हजार रुपये में बेच दिया है।
लड़की ने अपनी मां और भाईयों के बारे में के के सेठ और उषा से पता किया, तो दोनों ने बताया कि वजीरो ने उसे 75 हजार रुपये में बेच दिया है। और मां और भाई उसे छोड़कर वहां से चले गए हैं। इसके बाद तो मानों वजीरो की बेटी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। के के सेठ उससे जबर्दस्ती करता। लेकिन एक दिन वजीरो की बेटी किसी तरह उसके चंगुल से भाग खड़ी हुई और पुलिस को पूरा मामला बताया। पुलिस ने के के सेठ और उसकी पत्नी उषा को बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।पुलिस के मुताबिक, के के सेठ ने अपनी हवस की आग बुझाने से पहले वजीरो और उसके दो मासूम बेटों का भी कत्ल कर दिया था। दोनों बच्चों की लाश को उसने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की ट्रैक पर फेंक दी थी। वजीरो की लाश को उसने बक्से में बंद कर कश्मीरी गेट बस अड्डे पर फेंक दी थी। उसके बाद के के सेठ ने वजीरो की बेटी को बेचने की झूठी कहानी सुना दी।
जब पुलिस ने वजीरो की लाश के बारे में अखबार में विज्ञापन प्रकाशित कराया, तो के के सेठ अपनी बेगुनाही साबित करने पर जुट गया। वो पुलिस को ये मानने के लिये मजबूर करने लगा कि वजीरो का कातिल वही है जिसने उसकी बेटी का बलात्कार किया है। वजीरो की बेटी ने उसे गलत फंसाया है। यानि वजीरो की बेटी की इज्जत उसने नहीं लूटी है। लेकिन पुलिस की कड़ी पूछताछ में के के सेठ टूट गया और अपना गुनाह कबूल कर लिया।
दिल्ली पुलिस भी मानती है कि अगर के के सेठ ने आरटीआई नहीं लगाई होती तो उन्हें वजीरो और उसके दो मासूम बेटों के हत्यारे का कभी पता नहीं चलता। यानि आरटीआई आम लोगों के लिये ही कारगार साबित नहीं हुई है पुलिस को भी एक मामले की गुत्थी सुलाझाने में एक अहम सुराग के तौर पर साबित हुई है।
1 comments:
A very interesting post on RTI.
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